>गर्भ निरोध के उपाय

> आज के समय में गर्भ निरोध एक आवश्यक जरूरत बन गया है लेकिन इसकी पर्याप्त जानकारी न हो पाने से लोग काफी परेशान होते हैं. प्रस्तुत है गर्भ निरोधकों की जानकारी का संग्रह-


सामान्य

पुरूषों के लिए क्या गर्भनिरोधक विकल्प उपलब्ध हैं?
पुरूषों के लिए गर्भ निरोधक विकल्प है – अस्थायी सुरक्षा के लिए कंडोम और स्थायी सुरक्षा के लिए नसबन्दी।
महिलाओं के लिए गर्भ निरोधक विकल्प क्या-क्या है?
महिलाओं के लिए उपलब्ध गर्भ निरोधक विकल्प हैं (1) जनाना कंडोम (2) स्पर्मिसाइडस (3) मौखिक गोलियां (4) इंजैक्शन द्वारा दिए जाने वाले गर्भ निरोधक (5) इन्टरा युटरीन डिवाइज (6) ट्यूब को बन्द करना (ट्यूबक्टोमी)
जरूरत के आधार पर उपलब्ध गर्भ निरोधकों की पहुंच कहां तक है?
जरूरत के आधार पर उपलब्ध गर्भनिरोधकों की पहुंच निम्न प्रकार से हैः
1. किशोर/युवा विवाहित दम्पत्ति – जिन की कोई सन्तान न हो।
– स्त्री/परुष के कंडोम
– संयुक्त हॉरमोन गर्भनिरोधक गोलियां
– प्रोजेस्ट्रीन की गोलियां
– सेन्टकरोमन (सहेली)
– प्राकृतिक परिवार-नियोजन
2. विवाहित दम्पत्ति – /जिनके बच्चे हैं, बच्चों में अन्तराल चाहते हैं।
– स्त्री/पुरूष के कंडोम
– संयुक्त हारमोनल गर्भ निरोधक गोलियां
– आई यू डी
3. विवाहित दम्पत्ति – जिनके परिवार परिपूर्ण हैं।
– प्रोजेस्टीन केवल गोलियां
– डैपो – प्रोवेरा
– आई यू डी
– स्त्री/पुरूष नसबन्दी
4. स्तनपान कराने वाली माताएं
– स्त्री/पुरूष कंडोम
– प्रोजेस्टीन की केवल गोलियां
– डैपो – प्रोवेरा
– आई यू डी

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पुरूष कंडोम
पुरूष कंडोम क्या होता है?
पुरूष कंडोम वह थैली है जो कि पुरूष के खड़े लिंग पर चढ़ाने के लिए बनाई जाती है।
यह किस चीज से बनाई जाती है?
अधिकतर कंडोम लेटैक्स रबर से बनाए जाते है।
कंडोम के उपयोग के क्या लाभ होते हैं?
कंडोम के उपयोग के निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं – (1) जब नियमित रूप से और सही रूप से कंडोम का इस्तेमाल किया जाता है तो वह सबसे अधिक भरोसे की विधियों में से एक है जिनसे जन्म पर नियन्त्रण बनता है। (2) इनका उपयोग उपभोक्ता के लिए सरल है। थोड़े से अभ्यास से वे इसका उपयोग करके सम्भोग के आनन्द से आत्मविश्वास पा सकते हैं। (3) कंडोम की जरूरत तभी पड़ती है जबकि आप सम्भोग करना चाहते हैं जबकि अन्य गर्भनिरोधक आपको हर समय लेने पड़ते हैं या धारण करने पड़ते हैं। (4) कंडोम एकमात्र ऐसा साधन है जो कि यौन सम्बन्धों से फैलने वाले रोगों को फैलने से रोकता है इनमें एच आई वी भी शामिल हैं जब उनका नियमित और सही इस्तेमाल हो। (5) किसी भी उम्र के पुरूष इसे धारण कर सकते हैं। (6) सरलता से उपलब्ध होते हैं और सभी जगह मिलते हैं।
एक कंडोम के उपयोग की हानियां क्या हो सकती हैं?
कंडोम के उपयोग की हानियां निम्नलिखित हैं – (1) जिन लोगों को लेटैक्स से अलर्जी होती है उन्हें खुजली दे सकता है। (2) सम्भोग के समय कंडोंम के फट जाने या खिसक जाने की आशंका रह सकती है। (3) यदि वैसलीन या तेल से चिकना करके इस्तेमाल किया जाए तो कंडोम कमजोर पड़ सकता है या टूट सकता है।
गर्भ से सुरक्षा देने में कंडोम कितना प्रभावशाली है?
यदि 100 महिलाओं के साथी नियमित रूप से और सही रूप से कंडोम का उपयोग शुरू करते हैं तो पहले वर्ष में 100 में से 3 गर्भधारण होते हैं। यदि उपयोग अनियमित हो या सही न हो तो 14 गर्भधारण की सम्भावना हो सकती है।
गलत या अनुचित उपयोग के क्या सम्भावित कारण हो सकते हैं?
निम्नलिखित कारणों से इसका गलत या अनुचित उपयोग हो सकता है – लिंग के पूरी तरह खड़े होने से पहले ही कंडोम पहन लेने के कारण या कंडोम को पूरा ऊपर तक न पहनने के कारण आदि।
कंडोम के उपयोग को सही करने की क्या तकनीक है?
कंडोम के सही उपयोग की विधि इस प्रकार है –
1. सुनिश्चित करें कि पैकेट और कंडोम अच्छी स्थिति में हैं, यदि उस पर समाप्ति की तारीख दी हो तो ध्यान दें कि कहीं तारीख निकल तो नहीं चुकी।
2. पैकेट को एक कौने से खोलें, ध्यान दें कि अपने नाखूनों, दांत से या बड़ी बरूखी से कंडोंम को साथ में न काट दें।
3. रोल किए हुए कंडोम को अपने खड़े लिंग के टिप पर रखें।
4. उसे नीचे की ओर लिंग के मूल आधार तक पूरा खोल दें, अगर कोई हवा के बब्बल आ गए हैं तो उन्हें निकालें (हवा के बबूले कंडोंम को तोड़ सकते हैं)
5. ऊपर कंडोम के टिप पर कम से कम आधा इंच जगह छोड़ दें ताकि विर्य उसमें एकत्रित हो सके।
6. यदि आपको कुछ चिकनापन चाहिए तो उसे कंडोम के बाहर लगाएं। परन्तु हमेशा जल आधारित चिकनाई का प्रयोग करें (जैसे कि ‘के वाई’ जैली जो कि दवा की दुकान पर आमतौर पर मिल जाती है) तेल आधारित चिकनाई जैसे वैसलीन/बेबी ऑयल। नारियल तेल का उपयोग न करें क्योंकि इससे लेटैक्स टूट सकता है।
यदि रोल किया हुआ कंडोम खुले न तो क्या करना चाहिए?
कंडोम को लिंग के ऊपरी भाग पर रिम से रोल करते हुए सरलता से और कोमलता से खोलना चाहिए। यदि आपको उससे जुझना पड़े तो या कुछ सैकेन्ड से अधिक समय लगे तो सम्भवतः इसका अर्थ है कि आप उसे उल्टा चढ़ा रहे हैं। कंडोम को उतारने के लिए उसे ऊपर तक वापिस रोल नहीं करना है। रिम से उसे पकड़ो और खींच लो और फिर दूसरा नया कंडोम चढाओ।
कंडोम को कब हटाना चाहिए?
लिंग के ढीले पड़ने से पहले उस खींचना है और कंडोम को लिंग के अन्त में रोको, ध्यान पूर्वक खोंचो कि वीर्य बाहर की ओर बिखरे नहीं।
कंडोम को फेंकना कैसे चाहिए?
कंडोम को सही तरीके से फेंकना चाहिए – उदाहरणतः किसी कागज या टिशू में लपेट कर फेंकना चाहिए। उसे टॉयलेट मे डालना उचित नहीं – यह प्राकृतिक रूप से घुलता नहीं इसलिए सीवर को बन्द कर सकता है।
यदि सम्भोग करते हुए कंडोम फट जाए तो क्या करना चाहिए?
यदि सम्भोग करते समय कंडोम फट जाए, तो जल्दी से उसे उतारें और दूसरा लगायें। सम्भोग करते हुए, समय-समय पर कंडोम को देखते रहें कि कहीं वह खिसक न जाए या फट न जाए। यदि कंडोम फट जाए या आप को लगे कि सम्भोग के दौरान वीर्य बाहर निकल गया है तो आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने पर विचार करें जैसे कि सुबह उठते ही गोली ले लेना।
क्या एक की अपेक्षा दो कंडोम अधिक प्रभावशाली रहते है?
एक ही समय में दो कंडोम का उपयोग न करें, क्योंकि जब दो लेटैक्स आपस में रगड़ खायेंगे तो फट जायेंगे।
कंडोम की देखभाल से सम्बन्धित कुछ टिप्स बतायें।
1. सम्भव हो सके तो कंडोम को ठन्डे अंधेरे स्थान पर रखें।
2. कंडोम को अतिरिक्त गर्मी, रोशनी और हुमस से बचायें।
3. सावधानी से पकड़ें। नाखून और अंगूठी उसे हानि पहुंचा सकते हैं।
4. उपयोग से पहले उसे खोले नहीं, इससे वे कमजोर हो जाते हैं और खोले बिना भी चढ़ाना कठिन है।
यदि कंडोम अथवा चिकनाई से जननेन्द्रिय मे खुजली या रैश हो जाए तो क्या करना चाहिए?
यदि कंडोम अथवा चिकनाई से जननेन्द्रिय में खुजली या रैश हो जाए तो निम्नलिखित उपचार करें –
1. पानी को चिकनाई की तरह इस्तेमाल करने का प्रयास करें
2. खुजली और एलर्जी तो नहीं है इसके लिए डाक्टर के पास जायें।
यदि कंडोम चढाते हुए या उसका उपयोग करते समय किसी पुरूष का लिंग खड़ा नही रह पाता तो क्या करना चाहिए?
ऐसी स्थिति मे निम्नलिखित करें –
1. स्परमिसिड के बिना वाले सूखे कंडोम का उपयोग करने का प्रयास करें।
2. अपनी साथी महिला साथी से उसे चढ़ाने के लिए कहें जिससे उसके प्रयोग से ज्यादा मजा आयेगा।
3. लिंग पर अधिक पानी जल आधारित चिकनाई जैसे कि के वाई जैली का प्रयोग करें और कंडोम चढे लिंग पर बाहर से अधिक चिकनाई लगायें।
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महिला कंडोम

महिला कंडोम क्या होता है?
महिला कंडोम 17 सेमी. (6.5 इंच) लम्बी पोलीउस्थ्रेन की थैली होतीहै। सम्भोग के समय पहना जाता है। यह सारी योनि को ढक देती है जिससे गर्भ धारण नहीं होता और एच आई वी सहित यौन सम्पर्क से होने वाले रोग नहीं होते।
महिला कंडोम की क्या विशेषता है?
कंडोम के दोनों किनारों पर लचीला रिंग होता है। थैली के बन्द किनारे की ओर से लचीले रिंग को योनि के अन्दर डाला जाता है ताकि कंडोम अपनी जगह पर लग जाए। थैली की दूसरी ओर खुले किनारे का रिंग बल्वा के बाहर योनि द्वार पर रहता है। लिंग को अन्दर डालते समय वह रिंग एक मार्गदर्शक का काम करता है और थैली को योनि में ऊपर नीचे उछलने से रोकता है। कंडोम में पहले से ही सिलिकोन आधारित चिकनाई लगी रहती है।
महिला के उपयोग के लाभ क्या हैं?
महिला कंडोम के उपयोग के लाभ इस प्रकार हैं –
1. कंडोम प्रयोग को अपने साथी के साथ के बांटने का अवसर महिला को मिलता है।
2. यदि पुरूष कंडोम प्रयोग के लिए राजी न हो तो महिला अपने लिए कर सकती है।
3. पौलियूरथेन से बने महिला कंडोम से पुरूष के लेटैक्स से बने कंडोम की अपेक्षा एलर्जी की सम्भावनाएं कम रहती हैं।
4. यदि सही इस्तेमाल किया जाए तो यह गर्भ धारण एवं एसटीडी से बचाता है।
5. सम्भोग के आठ घन्टे पहल से लगाया जा सकता है इसलिए इससे रतिक्रिया में बाधा नहीं पड़ती।
6. पौलियूथरेन पतला होता है और ऊष्मता को सह जाता है अतः यौन अनुभूत बनी रहती है।
7. इसे तेल आधारित चिकनाई से काम में लाया जा सकता है।
8. इसको रखने के लिए किसी विशेष सावधानी की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि पोलियूथेन पर तापमान और आर्द्रता के बदलाव का असर नहीं पड़ता। जनाना कंडोम निर्मित के पांच साल बाद तक काम में लायें जा सकते हैं।
गर्भधारण को रोकने में जनाना कंडोम कितना प्रभावशाली है?
यदि इसका सही ढ़ंग से और नियमित रूप से प्रयोग किया जाए तो इसकी प्रभविष्णुता 98 प्रतिशत है अगर सही और नियमित न हो तो प्रभविष्णुता की दर घट जाती है।
जनाना कंडोम के उपयोग की सही विधि क्या है?
जनाना कंडोम के उपयोग की सही विधि इस प्रकार है –
1. पैकेट को सावधानी से खोलें- अन्दर डालने के लिए सुविधाजनक स्थिति चुने-पालथी, एक टांग उठाकर, बैठकर या लेटकर
2. कंडोम के अन्दर वाले रिंग को अन्दर दबाएं अंगूठे और मध्यमा की मदद से ताकि वह लंम्बा और तंग हो जाए और तब आन्तरिक रिंग और थैली को यानि द्वार से डालें।
3. तर्जनी को कंडोम के अन्दर डालें और रिंग जहां तक जाये उसमें दबा दें।
4. सुनिश्चत करें कि कंडोमं सीधा लगा है और योनि में जाकर मुडे नहीं। बाहरी रिंग योनि से बाहर ही रहना चाहिए।
5. लिंग को डालते हुए उसे कंडोम के अन्दर ले जाने का रास्ता दिखायें और ध्यान रखें कि वह कंडोम से बाहर योनि में न चला जाए।
क्या महिला कंडोम का प्रयोग सरल है?
महिला कंडोम का उपयोग कठिन नहीं है परन्तु उसके उपयोग के लिए अभ्यास की जरूरत है। पहली बार सम्भोग के दौरान इसका उपयोग करने से पहले महिला को डालने और निकालने का अभ्यास कर लेना चाहिए। संस्तुति की जाती है कि इसके उपयोग में आत्मविश्वस्त होने और सुविधा महसूस करने के लिए उपयोग से पहले कम से कम तीन बार इसका अभ्यास कर लेना चाहिए।
क्या महिला कंडोम के लिए चिकनाई का प्रयोग किया जाना चाहिए, यदि हां तो कैसी चिकनाई?
महिला कंडोम में पहले से ही चिकनाई होती है, उनमें सिलिकोन आधारित स्परमिसिडिल रहित चिकनाई होती है। इससे कंडोम को लगाने में आसानी होती है और संभोग की गतिविध में सुविधा रहती है। पहले हो सकता है कि चिकनाई से कंडोम फिसले। यदि बाहरी रिंग कंडोम कंडोम के अन्दर चला जाये या योनि से बाहर आ जाए तो और अधिक चिकनाई की जरूरत पड़ती है। इसके अतिरिक्त, अगर सम्भोग के समय कंडोम का शोर हो तो थोड़ी सी चिकनाई और लगायें। महिला कंडोम जल आधारित के वाई जैली और तेल आधारित वैसलीन या बेबी ऑयल दोनों प्रकार की चिकनाई से लगाये जा सकते हैं।
सम्भोग के दौरान यदि कंडोम खिसक जाए या फट जाए तो क्या करना चाहिए?
यदि सम्भोग के समय कंडोम फट जाए या लिंग योनि में चला जाए तो एकदम रूकें और कंडोम को बाहर निकालें। नया कंडोम लगाएं और थैली के द्वार पर लिंग पर अतिरिक्त चिकनाई लगायें।
कंडोंम को कैसे निकालें या फैकें?कंडोम को निकालने के लिए बाहरी रिंग को हल्के से घुमायें और कंडोम को इस तरह बाहर निकालें कि वीर्य उसी में रहे। कंडोम को टिशु या पैकेट में लपेट कर फैकें। उसे टॉयलट में मत डालें।
क्या महिला कंडोम का दोबारा उपयोग हो सकता है?
नहीं इसका दोबारा उपयोग नहीं करना चाहिए।
महिला कंडोम कंडोम से क्या हानियां हो सकती हैं?
इसके उपयोग से निम्नलिखित हानियां देखने को आई हैं –
1. क्योंकि बाहरी रिंग योनि से बाहर रहता है तो कुछ कुछ औरतों का ध्यान उसी में रहता है।
2. सम्भोग के समय आवाजें कर सकता है। अधिक चिकनाई से यह सम्स्या हल हो सकती है।
3. कुछ महिलाओं को इसे लगाना और हटाना बड़ा कठिन लगता है।
4. गोली जैसे अनवरोधक की अपेक्षा इसकी असफलता दर कुछ ऊंची है।
क्या एक ही समय महिला और पुरूष कंडोम दोनो का उपयोग किया जा सकता है?
एक एक समय में दोनो प्रकार के कंडोम का उपयोग नहीं करना चाहिए। साथ-साथ उपयोग करने से रगड़ लगने पर कोई एक या दोनों ही फिसल सकते हैं या फट सकते हैं या बाहरी रिंग को हिलाकर योनि में डाल सकते हैं।
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स्परमिसिडिस

स्परमिसिडिस क्या है?
स्परमिसिडिस रासायनिक पदार्थ है जो कि सम्भोग से पूर्व महिला की योनि में डाल दिए जाते हैं ये वीर्य के जीवाणुओं को निष्क्रिय कर देते हैं या मार देते हैं ये विविध गर्भनिरोधक पदार्थों के रूप में उपलब्ध हैं, जिसमें क्रीम, फिल्म, फोम जैली और अन्य तरल एवं ठोस गोलियां हैं जो अन्दर डालने पर घुल जाती हैं।
इनकी प्रभविष्णुता क्या है?
इनकी कुशलता 80 से 85 प्रतिशत के बीच रहती है। यदि इन्हें मेकैनिकल अवरोधक साधनों जैसे कि कंडोम के साथ मिलाकर उपयोग मे लाया जाये तो इनकी कुशलता बढ़ जाती है।
ये किस प्रकार काम करते हैं?
ये जीवाणु को नष्ट कर देते हैं। या अचल कर देते हैं।
क्या एस टी आई और एच आई वी@एड्स से स्परमिडिस कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं?स्परमिडिस कुछ हद तक सुरक्षा दे सकते हैं पर ये सुरक्षा के लिए दी नहीं जाती। इसके विपरीत एन ओ एन ओ एक्स वाई एन ओ एल – 9 नामक स्ममिसिड का एच आई वी के खतरे वाले या गुदा परक कई बार प्रयोग करें तो टिशु उत्तेजित हो जाते हैं जिससे एच आई वी या अन्य एस.टी.डी की सम्भावनाएं बढ़ जाती हैं।
स्परमिसिड का प्रयोग कैसे करें?
पैकेट के ऊपर सही उपयोग के लिए विस्तृत आदेश लिखे रहते हैं इस प्रकार के पदार्थ का उपयोग करने से पहले ध्यान रखें कि आप आदेश पढ़ लें और समझ लें। सामान्यतः महिला बैठकर या पालथी मारकर इन्हें अपनी योनि में धीरे- धीरे गहरे में उतारती है। गर्भ निरोधक फोम्स, क्रीम्स, जैलिस, फिल्म और डालने वाली गोलियों को सम्भोग शुरू करने से पहले कम से कम दस मिनट चाहिए होते हैं ताकि वे घुल सकें। यह साधन डाले जाने के एक घन्टा बाद तक ही प्रभावशाली रहता है। जितनी बार योनि सम्भोग दोहराया जाए उतनी बार इसे डाला जाना चाहिए।
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संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां (सी ओ सीज)

संयुकत मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां क्या होती हैं?
संयुक्त मौखिक गर्भनिरोधक गोलियां जिन्हें सामान्यतः ‘द पिल’ कहा जाता है, वह औइस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन का सम्मिलन है – जिसे कि प्राकृतिक उर्वतकता को रोकने के लिए महिलाएं मुख से लेती है। संयुक्त मौखिक पिल कैसे काम करता है?
इस पिल का कार्य मुख्यतः इस प्रकार होता है।
1. शरीर मे हॉरमोन के सन्तुलन को बदल देता है जिससे कि प्राकृतिक रूप उत्पन्न शरीर में हॉरमोन वाला अण्डा उत्पन्न ही नहीं हो।
2. ग्रीवा से निसृत म्युकस को गाढ़ा कर देता है जो कि ग्रीवा में ‘म्युकस प्लग’ बना देता है जिससे कि वीर्य गर्भ में पहुंचकर अण्डे को उर्वर नहीं बना पाता।
3. इस पिल में गर्भाशय का अस्तर पतला हो जाता है जिससे उर्वरित अण्डे का गर्भाशय से सम्पर्क कठिन हो जाता है।
संयुक्त मौखित पिल प्रभावशाली है?
इसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावशाली होता है। सही ढंग का अर्थ है एक भी गोली लेने से न चूकना और सही समय पर गोली लेना।
पिल से क्या लाभ है?
पिल से लाभ निम्नलिखित हैं (1) बहुत प्रभावशाली है (2) सम्भोग में बाधा नहीं डालता (3) पीरियडस अधिकतर हल्के, कम पीड़ादायक और अधिक नियमित हो जाते है। माहवारी से पहले वाला तनाव दूर हो जाता है। (4) इससे स्तनों में होने वाले सुसाध्य रोगों से सुरक्षा प्राप्त होती है (5) अण्डकोश में कुछ प्रकार के काइस्टस के खतरे को कम करता है। (6) अण्डकोश और गर्भाशय में कैंसर विकास की आशंका को कम करता है।
क्या इस पिल से एस टी आई एवं एच आई वी@एड्स से सुरक्षा प्राप्त होती है?
नहीं, इससे कोई सुरक्षा प्राप्त नहीं होती।
पिल के अन्य क्या प्रभाव हो सकते हैं?
पिल लेने वाली अधिकतर महिलाओं पर कोई अन्य प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि कुछ औरतों पर कुछ पड़ते भी हैं – (1) बीमार महसूस करना (2) सिर दर्द (3) स्तनों में सूजन (4) थकावट (5) सम्भोग भावना में परिवर्तन (6) त्वचा में बदलाव जैसे मुहासे और तेलीय त्वचा या त्वचा में रंजकता (पिगमैन्टेशन) (7) मूड में बदलाव (8) पीरियड के बीच रक्त स्राव या धब्बे लगना।
कुछ प्रभाव ऐसे होते हैं जिनमें तत्काल सावधानी की जरूरत होती है। इनमें शामिल है – (1) तेज सिर दर्द (2) छाती में एवं टांगों में भयंकर पीड़ा (3) टांगों में सूजन (4) श्वास लेनें में कठिनाई (5) यदि खांसी में खून आये (6) दृष्टि या वाणी में अचानक खराबी (7) भुजा या टांग में कमजोरी या नमी।
किन परिस्थितियों में यह पिल नहीं दिया जाता?
निम्नलिखित परिस्थितियों में पिल नहीं दिया जाना चाहिए – (1) यदि आप किसी रक्तवाहिनी से पहले थक्का (क्लॉट) आ चुका हो (2) अत्यधिक मोटापा (3) चल फिर न सकना (अर्थात व्हील चेयर के सहारे रहना) (4) काबू से बाहर मधुमेह (5) उच्च रक्तचाप (6) यदि आपके किसी नजदीकी रिश्तेदार को 45 वर्ष की आयु से पहले थरौमबोसिस, दिल का दौरा या लकवा (स्ट्रोक) हुआ हो। (7) तेज माइग्रेन (8) यदि आप 35 वर्ष से ऊपर के हैं तो धूम्रपान का इतिहास (9) स्तनपान कराने वाली माताएं (10) माइग्रेन का इतिहास होने पर।
पिल का प्रयोग कैसे होता है?
यह संयुक्त पिल सामान्यतः 28 पिल्स के पैकेट में आता है। माहवारी चक्र के पांचवे दिन से पहले पिल लेना होता है (माहवारी के पहले दिन को पहला मानकर चलें)- जहां (स्टार्ट) शुरू लिखा है उस ओर से गोलियां लेनी शुरू करें।- इक्कीस दिन तक हर रोज एक ही समय पर एक पिल लेते रहें- अन्तिम सात दिनों में आयरन रहता है। इसी दौरान माहवारी का समय हो जाता है।- फिर से नया पैकेट लेकर शुरू करें।
यदि कोई पिल लेना भूल जायें तो क्या करें?
यदि कोई एक पिल लेना भूल जायें तो, यह जरूरी है याद आते ही ले लें और अगला पिल पहले से निश्चित समय पर लें।- यदि लगातार दो पिल लेना भूल जाए, … दो दिन तक दो दो पिल लें और फिर पहले की तरह लेने लगें।- यदि कोई तीन या उसके अधिक पिल लेना भूल जाए – तो पिल लेना बन्द कर दें और अगले माहवारी चक्र के शुरू होने तक कोई अन्य जन्म निरोधक लें। यदि माहवारी चक्र समय पर शुरू न हो तो डाक्टर के पास जाना जरूरी है।
यदि पिल लेते समय मितली महसूस हो तो क्या करना चाहिए?
पिल को रात के समय या खाने के साथ लें।
इसके प्रभाव स्वरूप यदि हल्का सिर दर्द हो तो उससे कैसे निपटना चाहिए?
इब्रफिन, पैरासिटामोल जैसी अन्य कोई पीड़ा निवारक दवा ले लेनी चाहिए।
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मौखिक गर्भनिरोधक प्रोजेस्टिन मात्र (मिनी पिल)

प्रोजेस्टन मात्र क्या होते हैं?
प्रोजेस्टोजन ओनली या प्रोजेस्टिन ओनली पिल्स (पी ओ पी) ऐसा गर्भ निरोधक है जिसमें केवल सिन्थेटिक है और ओइसट्रोजन नहीं है। इन्हें मिनी पिल्स भी कहते हैं।
पी ओ पी कैसे काम करता है?
इस गर्भ निरोधक में तीन चीजें होती हैं।
(1) पहले सामान्य गर्भनिरोधक की तरह, पीओपी आपके शरीर को यह एहसास देता है कि आप गर्भवती हैं और आप के अण्डकोश को अण्ड विसर्जन से रोकता है।
(2) दूसरे, ये मिनी पिल्स आपकी कोख (जहां बच्चा पनपता है) में बदलाव ले आता है। (कि यदि अण्ड विसर्जन हो भी जाए तो आपका गर्भाशय उसे गर्भ धारण नहीं करने देता)
(3) तीसरे, पी ओ पी से अण्डकोश और योनि के बीच का म्युकस गाढा हो जाता है (गर्भाशय के बाहर आने के लिए योनि एक द्वार है) गाढे म्युकस से अण्डे तक पहुंचने के लिए वीर्य को काफी कठिनाई झेलनी पड़ सकती है।
प्रो जेस्टीन ओनली पिल किन महिलाओं के लिए उचित है?
प्रोजेस्टीन ओनली पिल सामान्य जन्म निरोधक गोलियों से बेहतर होती है (1) क्योंकि यदि आप स्तनपान करवा रही हैं तो यह आपके दूध बनने की प्रक्रिया को बदलता नहीं (2) यदि आप 35 वर्ष से अधिक आयु के हैं (3) जो महिलाएं धूम्रपान करती हैं। (4) जिन्हें उच्च रक्तचाप रहता है (5) वजन बहुत अधिक हो (6) रक्त के थक्के बनते हों तो यह लाभदायक रहताहै।
प्रोजेस्टीन ओनली पिल किन महिलाओं को नहीं लेना चाहिए?
(1) यदि आप किसी असामान्य गर्भधारण से गुजर चुकी हैं जिसमें भ्रूण गर्भाशय से बाहर था। (2) यदि आपको रक्तवाहिकाओं का कोई तीव्र रोग हो या असामान्य रूप से ऊंचाक्लोस्ट्रोल हो या अन्य रक्त परक फैट की समस्या हो (3) यदि आपको स्तन का कैंसर हो (4) यदि आपको योनि से रक्तस्राव हो रहा हो जिसका कारण पता न चल रहा हो तो डाक्टर अपने आप प्रोजेस्टीन ओनली पिल आप को देने से मना कर देगा।
प्रोजेस्टीन ओनली पिल लेने के बाद भी, क्या गर्भधारण हो सकता है?
प्रोजेस्टीन ओनली पिल को सही ढंग से लगातार लेने वाली 100 महिलाओं में से दो या तीन गर्भ धारण कर जाती हैं।
क्या प्रोजेस्टीन ओनली पिल से कुछ हानियां भी हो सकती हैं?
प्रोजेस्टीन ओनली पिल के निम्नलिखित सह प्रभाव हो सकते हैं (1) पीरियड्स के बीच धब्बे लगना या रक्त स्राव इसमें असुविधा तो होती है पर स्वास्थ्यपरक कोई खतरा नहीं होता। यदि लगे कि रक्त स्राव पहले से भारी है या उससे परेशान हों (2) वजन बढ़ जाए (3)स्तनों में ढीलापन लगे तो डाक्टर से परामर्श कर सकते हैं।
मिनी पिल को कैसे खाना चाहिए?
प्रत्येक पैकेट में 28 पिल्स होते हैं। प्रत्येक पिल में हॉरमोन होते हैं। रक्त स्राव के पांचवे दिने से इन्हें लेना शुरू करते हैं हालांकि, अगर आप पक्की तरह जानती हैं कि आपने गर्भधारण नहीं किया तो पीरियड चक्र में किसी भी समय शुरू किया जा सकता है।
पिल शुरू करने के एकदम बाद क्या सहप्रभाव पड़ सकते हैं?
जब आप पीओपी को पहले पहले शुरू करते हैं और जैसे ही शरीर को इसकी आदत पड़ती है आपके शरीर पर इसका कुछ प्रभाव दिखाई दे सकता है जैसे कि पीरियडस के बीच में ही रक्त स्राव होने लगना और सिर दर्द रहना। उनसे कोई खतरा नहीं होता और सामान्तः पहले दो महीने में ठीक भी हो जाती है। अगर ऐसे लक्षण दिखें जो कि बहुत देर तक चलने वाले हों या बहुत तीव्र हों तो डाक्टर से परामर्श करें।
यदि पिल लेना भूल जायें तो देर से लें तो क्या होता है?
1. यदि आप एक पीओपी लेना भूल गए हैं या तीन या उसके अधिक घन्टे की देर हो जाए तो याद आने के साथ ही उसे खा लें। उसके बाद नियमित समय पर पीओपी लेते रहें। ध्यान रखें कि अगले 48 घन्टे में अगर आप करें तो कंडोम जैसे अन्य सहायक साधन का इस्तेमाल जरूर करें।
2. यदि लगातार दो या अधिक पीओपी लेना भूल जायें, तो उसी समय शुरू कर दें और दो दिन तक दो पिल लेते रहें। अन्य सहायक साधनों का इस्तेमाल एकदम शुरू कर दें। यदि 4 से 6 हफ्ते में पीरियड शुरू न हो तो डाक्टर से मिलें।
3. यदि आपने असुरक्षित सम्भोग किया है, बिना सहायक साधन के सम्भोग और पीओपी लिये नहीं या देर से लिये हैं तो 4-6 हफ्ते तक पीरियड शुरू न होने पर डाक्टर सें आपातकालीन गर्भनिरोधक देने के लिए कहें, डाक्टर से मिलें।
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आपातकालीन गर्भनिरोधक

आपातकालीन गर्भनिरोधक या आपातकालीन जन्म नियंत्रण क्या होता है?
जब कोई महिला बिना गर्भनिरोधक के प्रयोग के असुरक्षित यौन सम्भोग करती है तो उसे गर्भधारण से बचने के लिए आपातकालीन गर्भनिरोधक का प्रयोग किया जाता है।
किन परिस्थितियों में हमें आपातकालीन गर्भनिरोधक की जरूरत पड़ती है?
जिस महिला ने असुरक्षित सम्भोग किया है और गर्भधारण नहीं करना चाहती वे निम्न परिस्थियों में आपातकालीन गर्भनिरोधक ले सकती हैं। (1) उन्हें सम्भोग की सम्भावना नहीं थी और किसी प्रकार के गर्भनिरोधक नहीं कर रहीं थी। (2) उसकी अनुमति के बिना जबरदस्ती सम्भोग किया गया। (3) कंडोम फट गया या स्लिप हो गया (4) गर्भनिरोधक समाप्त हो गए थे या लगातार दो तीन पिल्स लेना भूल गई थी।
आपातकालीन गर्भनिरोधक कैसे करते हैं?
आपातकालीन गर्भनिरोधक आपको गर्भधारण से बचा सकते हैं (1) अण्डे का अण्डकोश से बाहर नहीं आने देकर (2) वीर्य को अण्डे से न मिलने देकर (3) उर्वरित अण्डे को कोख से न जुड़ने देकर।
यौनपरक सम्भोग के कितनी देर बाद तक आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल्स लिए जा सकते हैं?असुरक्षित यौनपरक सम्भोग के पहले 72 घन्टे में आपातकालीन गर्भनिरोधक उपाय किए जा सकते हैं फिर भी यही परामर्श है कि जल्दी से जल्दी ले लें।
आपातकालीन गर्भनिरोधक कितने प्रकार के होते हैं?
दो प्रकार के हैं (1) आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल्स (ईसीपीस) (2) आई यू डीस
आपातकालीन पिल क्या होता है और इसका उपयोग कैसे होता है?
इस पील में लीवोनर्जेस्ट्रल नामक पदार्थ होता है जो कि आपातकालीन गर्भनिरोध के लिए काम में लाया जाता है। दो पिल दो बार में लेने होते हैं (एक परन्तु और दूसरा अगले 12 घन्टे के बाद) या दोनों पिल एक साथ भी लिये जा सकते हैं।
एक आईयूडी आपातकालीन गर्भनिरोधक के रूप में कैसे काम करता है?
यह आईयूडी ‘टी’ के आकार का प्लास्टिक से बना यन्त्र होता है जिसे कि सम्भोग के पांच दिनों के अन्दर अन्दर डाक्टर कोख में लगाता है। आई यू डी का काम होता है (1) वीर्य को अण्डे से मिलने देकर (2) अण्डे को गर्भाशय से न मिलने देने से। आपके अगले पीरिययड के बाद डाक्टर आई यू डी को बाहर निकाल सकता है अथवा दस साल तक जनन नियंत्रण के लिए लगे भी रहने दिया जा सकता है।
आपातकालीन गर्भनिरोधक पिल के क्या कोई सह प्रभाव भी होते हैं?
आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने पर पड़ने वाले अत्यन्त सामान्य सहप्रभाव निम्नलिखित हैं। (1) मित्तली और उल्टी (2) अनियमित योनिपरक रक्त स्राव (3) थकावट (4) सिर दर्द (5)सिर घूमना (6) स्तनों का ढीलापन।
पिल लेते समय मित्तली से कैसे निपटना चाहिए?
मित्तली कम करने के लिए (1) पिल लेने से पहले कुछ खा लेने की कोशिश करें। (2) दूसरी बार पिल्स लेने से उनके प्रभाव को कम करने के लिए मित्तली न होने देने वाली दवा लीजिए। (3) पिल्स को दूध या पानी के साथ लें।
क्या आपातकालीन गर्भनिरोधक हमेशा होते हैं?
हां, ये पर्याप्त प्रभावशाली हैं। यदि 100 महिलाएं आपातकालीन गर्भनिरोधक का उपयोग करें तो केवल एक गर्भवती होती है।
आपातकालीन गर्भनिरोधक लेते समय कौन से संकेत खतरे के माने जाते हैं जिनसे व्यक्ति को सावधान रहना चाहिए?
आपातकालीन गर्भनिरोधक लेने वाली कोई महिला यदि निम्नलिखित लक्षणों को महसूस करे तो उसे तुरन्त डाक्टर के पास जाना चाहिए। (1) पेट में तेज दर्द (2) आगे आने वाले पीरियड में सामान्य रूप से कम रक्त स्राव (3) यदि अगली माहवारी न हो।
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प्रौजैस्टिन ओनली इनजैक्टेबलस

प्रोजैस्टिन ओनली इनजैक्टेबलस क्या होते हैं?
इन इंजैक्शनों को प्रोजैक्ट्रोन डालकर तैयार किया जाता है। दो प्रकार के उपलब्ध है- डी एम पी ए – वे डिप्पो जो हर तीसरे महीने लगाये जाते हैं और नेट इन (नरेथिडरोन एननथेट) जो हर दूसरे महीने लगाये जाते हैं।
ये प्रौजेस्टिन ओनली इनजैक्टेबल कैसे काम करते हैं?
ये इंजैक्शन (1) अण्डों के बनने को रोककर (2) ग्रीवा परक ग्युकस को गाढ़ा करते हैं ताकि वीर्य ऊपर के मार्ग में प्रवेश ने करे – इस तरह काम करते हैं।
डी एम पी ए के उपयोग के क्या लाभ हैं?
लाभ निम्नलिखित हैं (1) ये बहुत प्रभावशाली हैं। (2) लम्बे समय तक गर्भधारण से सुरक्षा देता है और इसे बदला जा सकता है। (3) उपयोग में सरल प्रतिदिन पिल्स लेने के झमेले को दूर करता है। (4) यह इंजैक्शन के सह प्रभावों से मुक्त है जैसे कि धमनियों में रक्त के थक्के बनना। (5) इक्टोपिक गर्भ से बचाता है (गर्भाशय के बाहर का गर्भ) और अण्डकोश के कैंसर से बचाता है।
डी एम पी ए के क्या कोई सह प्रभाव होते हैं?
डी एम पी ए का प्रयोग करते हुए कुछ महिलाओँ के माहवारी पीरियड्स में कुछ बदलाव आ जाता है – (1) अनियमित और असंभावित रक्त स्राव या धब्बे लगना। (2)माहवारी रक्त स्राव में बढ़ाव या घटाव या बिल्कुल बन्द। अन्य सम्भावित सह प्रभाव है -वजन बढना, सिर दर्द, घबराहट, पेट में खराबी, चक्कर आना, कमजोरी या थकावट।पीरियडस न होने में कोई नुकसान नहीं है और सामान्यतः पीरियडस डेपो प्रोवेश के बन्द करने पर पुनः स्वाभाविक हो जाते हैं यद असामान्य रूप से भारी या लगातार रक्त स्राव हो तो डाक्टर से मिलें।
डी एम पी ए कितना प्रभावशाली है?
डी एम पी ए उतना ही प्रभावशाली है जितना कि अपनी ट्यूबों को बंधवाना और गर्भनिरोध के कई अन्य साधनों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है जसमें गर्भनिरोधक गोलियां, कंडोंम और डॉयफ्राग्मस शामिल हैं पर यह एड्स या एसटीडी से सुरक्षा प्रदान नहीं करता।
क्या डी एम पी ए का प्रभाव स्थायी है?
नहीं, डी एप पी ए का प्रभाव लगभग तीन महीने तक रहता है। गर्भ से बचने के लिए इसे तीन महीने के बाद दोहराना जरूरी है। डी एम पी ए के प्रयोग को छोड़ते ही अण्डाशय अपने प्राकृतिक कार्यों को जल्द ही करने लगता है। अन्तिम बार लेने के बाद औसतान 9से 10 महीने के बाद गर्भ धारण किया जा सकता है।
डी एम पी ए किस प्रकार दिया जाता है?
डीएम पी ए का इंजैक्शन नितम्बों में या भुजबली में हर तीसरे महीने दिया जाता दै।
डी एम पी ए कब शुरू करना चाहिए?
1. माहवारी चक्र नियमित है -तो माहवारी के बाद पहले सात दिनों में कभी भी
2. बच्चे के जन्म के बाद यदि स्तन पान करा रही है – तो बच्चे के जन्म के छह सप्ताह के बाद
3. बच्चे के जन्म के बाद, यदि स्तनपान नहीं करा रही – तो तुरन्त या बच्चे के जन्म के पहले छह हफ्तों के दैरान कभी भी।
4. गर्भपात या गर्भ गिरवाने पर – तो पहले या दूसरे करवाए गए गर्भपात या गर्भधारण न करने के पहले सात दिन के अन्दर
डी एम पी ए के उपयोग के लिए कौन उपयुक्त है?
इसका उपयोग उन महिलाओं के लिए सुरक्षित है जो (1) स्तनपान करवा रही हैं (2) सिगरेट पीती हैं। (3) कोई बच्चा नहीं है। (4) किशोरावस्था से लेकर 40 वर्ष की आयु तक कभी भी (5) स्तनों में सुसाध्य रोग (6) हल्के से माध्यम स्तर तक का उच्चरक्तचाप।
डी एम पी ए का उपयोग किन्हें नहीं करना चाहिए?
जिन औरतों को निम्नलिखित कोई समस्या हो उन्हें डी एम पी ए का उपयोग नहीं करना चाहिए – पीलिया रह चुका हो, रक्त के थक्के, अनजाने कारण से योनिपरक रक्त स्राव स्तनों का कैंसर य प्रजनन अंगों का कैंसर, गर्भधारण अथवा आशंका या डेपो-प्रोवेश की दवाओं से एलर्जी।
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इन्ट्रा युटरीन डिवाइज

इन्ट्रा युटरीनडिवाइज क्या है ?

इसे छोटे में आई यू डी कहते हैं, टी की आकृति में छोटा सा, प्लास्टिक का यन्त्र है जिसके अन्त में धागा लगा रहता है। गर्भ रोकने के लिए आईयूडी को गर्भाशय के अन्दर लगाया जाता है। इसे डाक्टर के क्लीनिक में लगवाया जा सकता है। एक बार ठीक जगह लग जाने पर यह तब तक गर्भाशय में रहता है जब तक कि डाक्टर उसे निकाल न दे।
यह कैसे काम करता है?

आई यू डी वीर्य को अण्डे से मिलने से रोकती है। ऐसा करने के लिए यह अण्डे को वीर्य तक जाने में असमर्थ बनाकर और गर्भाशय के अस्तर को बदल कर करती है।
आई यु डी किस प्रकार की होती है?

आ यु डी के अलग-अलग प्रकार हैं – (1) कॉपर लगी आई यू डी – इसमें एक प्लास्टिक की ट्यब के अन्दर कॉपर की तार लगी रहती है। (2) नई प्रकार के आई यु डी में हॉरमोन छोड़ने वाला आई यु डी है – जो कि प्लास्टिक से बना होता है और उसमें प्रोजेस्ट्रोन हॉरमोन छोटी मात्रा में भरा रहता है।
कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई यु डी के क्या लाभ हैं?

हॉरमोन वाले युडी (1) कॉपर वाले आई यु डी से अधिक प्रभावशाली हैं (2) माहवारी को हल्का बनाते हैं। कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई डी यु की क्या हानियां हैं?हॉरमोन वाले आई यु डी (1) कापर वाले की अपेक्षा महंगे हैं (2)उपयोग के पहले छह महीनों में अनियमित रक्तस्राव या धब्बे लगने की समस्या हो सकती है।
आई यु डी के क्या लाभ हैं?

आई यु डी के बहुत से लाभ हैं – (1) यह गर्भनिरोध के लिए अत्यन्त प्रभावशाली है। (2) सुविधाजनक है – पिल लेने का कोई झंझट नहीं है। (3) मंहगा नहीं है। (4) डाक्टर किसी समय भी निकाल सकते हैं। (5) तुरन्त काम शुरू कर देता है। (6) सहप्रभावों को आशंका कम रहती है। (7) आई यू डू का उपयोग करने वाली माताएं सुरक्षा पूर्वक स्तनपान करवा सकती हैं।
गर्भनिरोधक में आई यू डी कितनी प्रभावशाली है?

यह गर्भनिरोध का सबसे प्रभावशाली साधन है। इसे यदि सही ढंग से लगाया जाए तो यह 99 प्रतिशत प्रभावशाली है।
आई यू डी कितनी देर तक प्रभावशाली रहता है?

निर्भर करता है कि आपका डाक्टर आपको कौन सा आई यू डी लगवाने को कहता है। कॉपर आई यू डीः टी यू 380 ए जो कि अब राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत उपलब्ध है, वह दस वर्ष के लम्बे समय तक आपके शरीर में रह सकता है। हॉरमोन वाले आई यू डी को हर पांचवे वर्ष में बदलने की जरूरत पड़ती है। इनमें से किसी को भी आपका डाक्टर हटा सकता है। यदि आप गर्भधारण करना चाहें या प्रयोग न करना चाहें तो।
इसकी हानियां क्या हैं?

हानियां निम्नलिखित हैं (1) गर्भाशय मे आई यू डी लगाने के पहले कुछ घन्टों में आपको सिरदर्द और पेट दर्द हो सकता है। (2) कुछ औरतों को यह लगवाने के बाद कुछ हफ्तों तक रक्त स्राव होता रहता है और उसके बाद भारी माहवारी होती है। (3) बहुत कम पर कभी, आई यू डी अन्दर डालते समय गर्भाशय में घाव हो सकता है। (4) यह आपको एड्स या एस टी डी से सुरक्षा प्रदान नहीं करता। वस्तुतः ऐसे संक्रामक रोग आई यू डी वाली औरतों के लिए संघात्मक हो सकते हैं। इसके अलावा, अधिक लोगों के साथ सम्भोग करने पर संक्रमण की आशंकाएं बढ़ सकती हैं।
आई यू डी को गर्भनिरोधक के रूप में काम में लाने के लिए कौन उपयुक्त है?

किसी भी परिस्थित में वे औरतें आई यू डी का उपयोग कर सकती हैं जो (1) स्तनपान करा रहीं हों (2) सिगरेट पीती हों (3) उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, जिगर या गालब्लैडर के रोग, मधुमेह या मिरगी का उपचार करा रही हों।
आई यू डी लगवाने वाले का उचित समय कौन सा है?

आई यू डी लगवाने का उचित समय निम्न है – (1) माहवासी चक्र के रहते – माहवारी चक्र के दौरान किसी भी समय – माहवारी रक्तस्राव के आरम्भ होने के बाद के पहले 12 दिनों में लगवाएं। (2) बच्चे के जन्म@गर्भपात- बच्चे के जन्म के 24 घन्टे के अन्दर अन्छर लगवायें।
आई यू डी कैसे लगाई जाती है?

सामान्यतः एक पीरियड की समाप्ति या उसके तुरन्त बाद लगाया जाता है। हालांकि इसे किसी भी समय लगवाया जा सकता है यदि आपको भरोसा हो कि आप गर्भवती नहीं हैं। आपको योनि परीक्षण करवाना होगा। डाक्टर या नर्स गर्भाशय का माप और स्थिति देखने के लिए एक छोटा सा यन्त्र उसमें डालेंगे। तब आई यू डी लगाया जाएगा। आपको सिखाया जाएगा कि उसके धागे को कैसे महसूस किया जाता है ताकि आप उशे ठीक जगह रख सकें सर्वश्रेष्ठ है कि आप उसे नियमित रूप से चक्र करते रहें, हर महीने के पीरियड के बाद कर लेना उत्तम है।
आई यू डी अपनी ठीक जगह पर हैं या नहीं, यह कब चैक करने का परामर्श दिया जाता है?

परामर्श है कि महिला (1) आई यू डी लगवानें के एक महीने के बाद सप्ताह में एक बार उसे चैक करें (2) असामान्य लक्षण दिखने पर चैक करें। (3) माहवारी के बाद चैक करें।
आई यू डी अपनी सही जगह पर है यह चैक करने के लिए महिला को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?आई यू डी चैक करने के लिए महिला को चाहिए कि (1) अपने हाथ धोये (2) पालथी मार कर बैठे (3) योनि में अपनी अक या दो अंगुली डालें और जब तक धागे को छू न ले अन्दर तक ले जायेय़ (4) फिर हाथ से धोये।
आई यू डी लगवाये हुए महिला को कब डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए?

तब डाक्टर से मिलना चाहिए जब (1) उसके साथी को सम्भोग के दौरान वह धागा छूता हो और उससे वह परेशान हो। (2) भारी और लम्बी अवधि तक होने वाले रक्त स्राव से होने वाली परेशानी (3) पेट के निचले भाग में तेज और बढ़ता हुआ दर्द विशेषकर अगर साथ में बुखार भी हो (4) एक बार माहवारी न होना (5) योनि से दुर्गन्ध भरा स्राव (6) परिवार नियोजन की कोई और विधि अपनाना चाहें या आई यू डी निकलवाना चाहें तब।
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सेंट्चरोमन

सेंट्चरोमन क्या है?

सेंट्चरोमन एक नया, स्टीरॉयड विहीन, सप्ताह में एक बार लिया जाने वाला मौखिक गर्भनिरोधक है जिसका हॉरमोनल मौखिक गर्भनिरोधक से कोई सम्भन्ध नहीं। यह उर्वारत अण्डे को गर्भाशय के अस्तर से जुड़ने से रोककर गर्भधारण से बचाता है।
सेंट्चरोमन के उपयोग के क्या लाभ हैं?

यह सुरक्षित है और घबराहट, वजन बढने, तरल पदार्थों के अवरोधन, उच्च रक्तचाप आदि जैसे हॉरमोनल उपाय से होने वाले सहप्रभावों से मुक्त है।
सेट्चरोमन का प्रयोग कब नहीं करना चाहिए?

निम्नलिखित परिस्थितियों में सेंट्चरोमन लगाये जाने की संस्तुति नहीं की जाती (1) पीलिया या लीवर के रोग के हाल ही मे हुए उपचार के कारण (2) अण्डकोश के रोग (3) तपेदिक (4) गुर्दे का रोग।
ये पिल्स कैसे लेने चाहिए?इसका कोर्स 30 मिलीग्राम की एक गोली सप्ताह में दो बार तीन महीने के लिए देकर शुरू करना चाहिए, बाद में जब तक गर्भ निरोधक की जरूरत महसूस हो तब तक सप्ताह में एक गोली देनी चाहिए। माहवारी चक्र के पहले दिन पहली गोली ली जानी चाहिए। गोली निश्चित दिन और निश्चित समय पर ली जानी चाहिए। बाद में होने वाले माहवारी चक्र की ओर ध्यान दिए बिना डोस नियमित रूप से चलता रहना चाहिए।
इसके सहप्रभाव क्या हो सकते हैं?

कुछ सहप्रभाव हैं – (1) माहवारी चक्र का लम्बा हो जाना (2) माहवारी में विलम्ब – पन्द्रह दिन से अधिक विलम्ब होने पर डाक्टर से परामर्श करें कि कहीं गर्भधारण तो नहीं हो गया।

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महिला बन्ध्यीकरण – ट्यूब बंधी

ट्यूबबंधी क्या होती है?

ट्यूब बंधी जिसे सामान्यतः अपनी ट्यूब बंधवाने के रूप में जाना जाता है, महिलाओं के बन्ध्यीकरण की यह शल्यक्रिय है। इस प्रक्रिय से अण्डवाही ट्यूबों को बन्द कर दिया जाता है जिससे कि अण्डा गर्भाशय तक पहुंच नहीं पाता। यह वीर्य को भी अण्डवाही ट्यूब तक पहुंचाकर अण्डे को उर्वरित होने से रोकता है।
जनाना बन्ध्यीकरण कितना भरोसे के लायक है?

जो औरतें और बच्चे नहीं चाहती उनके लिए यह स्थायी गर्भनिरोधक है। यह 99 प्रतिशत से अधिक प्रभावशाली है। इस बन्ध्यीकरण से 200 में से कोई एक महिला गर्भवती होती है। क्योंकि कटने या बन्द होने के बाद कभी कभार ही वे ट्यूबें वापिस जुड़ जाती हैं।
यह कैसे किया जाता है?

लोकल या रीढ़ की हड्डी में एनसथीशिया देकर ट्यूब बंधी करने की दो विधियां हैं – (1) एक मिनिलापरोटोमी के अन्तर्गत पेट में एक छोटा सा कट लगाया जाता है जिसके द्वारा ट्यूब को ढूंढकर काटा जाता है और बबन्द कर दिया जाता है। (2)लैपरोस्कोपिक ट्यूब बंधी के अन्तर्गत कार्बन डॉयोक्साईड या निटरोअस आक्साइड गैस से पेट को फुलाया जाता है, पेट की दीवार में छोट सा छन्द किया जाता है जिससे फाईब्रोप्टिक लाईट और बिजली के करंट से ट्यूबों को ठोस बना देने वाला एक यन्त्र डाला जाता है या हर ट्यूब के अन्त में प्लास्टिक का बैन्ड या क्लिप लगा दिया जाता है।
जनाना बन्ध्यीकरण के क्या लाभ हैं?

यह स्थायी है फिर आपको दोबारा गर्भनिरोध के बारे में सोचना नहीं पड़ता।
जनाना बन्ध्यीकरण की हानियां क्या हैं?

क्योंकि यह स्थायी है इसलिए आगे आने वाले वर्षों में हो सकता है कि आपको पछतावा हो विशेषकर अगर परिस्थितियां बदल जायें तो। मर्दाना नसबन्दी की अपेक्षा इस स्थिति को पुनः बदलना कठिन है।
इसका प्रभाव कितनी जल्दी पड़ता है?

अगली माहवारी होने तक आपको गर्भनिरोध के अन्य किसी साधन का उपयोग करते रहना चाहिए।
क्या बन्ध्यीकरण से महिला की माहवारी में कोई बदलाव आयेगा या रक्त स्राव बन्द हो जाएगा?नही बन्ध्यीकरण का महिला की माहवारी पर कोई ऐसा प्रभाव नहीं पड़ता।
क्या इससे मेरी सम्भोग (सैक्स) की इच्छा में कमी आ जाएगी?

नहीं, बल्कि हो सकता है कि उसमें पहले से अधिक आनन्द मिले क्योंकि अन्य गर्भनिरोधक साधनों से होने वाली असुविधा इसमें नहीं है।
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पुरूष बन्ध्यीकरण – नसबन्दी

नसबन्दी क्या होती है?

यह एक ऐसा ऑपरेशन है जिससे कि फिर पुरूष जीवनभर किसी महिला को गर्भवती नहीं बना सकता। इसमें शुक्रवाहिका नामक दो ट्यूबों को काट दिया जाता है ताकि शुक्राणु वीर्य तक पहुँच ही न पायें।
नसबन्दी कैसे की जाती है?

सामान्यतः बहिरंग रोगी प्रक्रिया के अन्तर्गत ही यह आनऑपरेशन किया जाता है। इस में लगभग आधा घन्टा लगता है। इस प्रक्रिया के दौरान आप जागृत रहते हैं। आप के अण्डकोश को सुन्न करने के लिए आप को लोकल एनसथमीशिया देगा। इसके बाद वह आप के अण्डकोश की ओर छोटा सा छेद करेगा और उससे शुक्रवाहिका को उस ओर खींच लेगा। आप को थोड़ी चुभन और थोड़ा खिंचाव महसूस होगा। शुक्र वाहिका का एक छोटा सा अंश निकाल दिया जाता है। शुक्रवाहिका के किनारों को सिलकर या सेक देकर जोड़ा जाता है अथवा अन्य किसी भी माध्यम से बन्द कर दिया जाता है। यही प्रक्रिया डॉक्टर दूसरी ओर भी करेगा। अण्डकोश के दोनों द्वारों को सिल कर बन्द कर दिया जाएगा।
बिना चाकू के नसबन्दी क्या होती है?

इसके अन्तर्गत अण्डकोश में कट लगाने की अपेक्षा एक छोटा सा छेद किया जाता है। वह छेद इतना छोटा सा होता है कि बिना टांकों के ही भर जाता है।
गर्भनिरोध करने में नसबन्दी कितनी प्रभावशाली होती है इसे जन्म नियन्त्रण का सबसे सुरक्षित साधन माना जा सकता है। नसबन्दी करने के एक साल में 10,000 दम्पतियों में से केवल 15 के गर्भधारण होता है।
क्या कोई ऐसा कारण भी है जिसके कारण नसबन्दी नहीं करवानी चाहिए?

जब तक आप का निश्चय पक्का न हो कि भविष्य में आप को सन्तान नहीं चाहिए तब तक नसबन्दी न करायें। यदि आप के जननांगों में या उसके आसपास कुछ संक्रमण हो रहा हो तो नसबन्दी करने में विलम्ब हो सकता है अथवा रक्त स्राव का कोई विकार हो तो भी विलम्ब हो सकता है।
क्या नसबन्दी को वापिस पलटा जा सकता है?

कुछ नसबन्दियों को पलटा जा सकता है या नकारा किया जा सकता है परन्तु यह शल्यक्रिया महंगी है और सामान्यतः पहुंच से बाहर होती है। हालांकि पलटने के बाद अधिकतर पुरूष शुक्राणुओं का निष्कासन करने लगते है। परन्तु सामान्यतः वे शुक्राणु अण्डे को उर्वरित करने में सक्षम हो पाते।
ऑपरेशन के लिए मुछे किस प्रकार तैयार होना चाहिए?

ऑपरेशन के दिन अपने साथ आरामदेह जांघिया लायें और सुनिश्चित करें कि आपके जननांग अच्छी तरह साफ हैं। हो सकता है कि आप का डॉक्टर भी आप को निर्देश दें कि आने से पहले किस तरह सफाई करनी है। हो सकता है कि वह आपको यह निर्देश भी दे कि अपने साथ किसी ऐसे व्यक्ति को लेकर आयें जो कि शल्य क्रिया के बाद आप को घर वापिस लें जा सके।
ऑपरेशन के बाद मैं क्या आशा कर सकता हूं?

ऑपरेशन के एकदम बाद आप का डॉक्टर आप के अण्डकोश पर बर्फ का पैक रखकर कुछ घन्टों तक आप को लिटाकर रखेगा। हो सकता है कि शल्य क्रिया के क्षेत्र में आप को कुछ घाव हों। घाव धीरे धीरे भरेंगे और दो हफ्ते में ठीक हो जायेंगे। कुछ हफ्तों में आपका स्वास्थ्य पूरी तरह सामान्य हो जाएगा।
मैं काम पर वापिस कब जा सकता हूं?

आराम दो दिन तक किया जाता है। कुछ दिन तक भारी काम और जोरदार व्यायाम से परहेज करना चाहिए।
क्या नसबन्दी एकदम से काम शुरू कर देगी?

नहीं, दोनों शुक्राशय से शुक्राणुओं को पूरी तरह खाली करने के लिए आप को 15 से 20 बार उनका निष्कासन करना होगा। इस कारण से शल्य प्रक्रिया के बाद तीन महीने तक कंडोम या परिवार नियोजन की किसी विधि का प्रयोग करना जरूरी है।
नसबन्दी के सहप्रभाव क्या क्या होते हैं?

नसबन्दी के बाद होने वाली समस्याओं में शामिल है : (1) रक्त स्राव (2) दर्द (3) संक्रमण
सामान्य फॉलोअप के अतिरिक्त वे कौन सी परिस्थितियां है जबकि नसबन्दी वाले पुरूष को डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए?

डॉक्टर से सम्पर्क करें
1. यदि आप को बुखार है।
2. किसी प्रकार की सूजन जो कि कम न हो रही हो या बिगड़ रही हो।
3. मूत्रत्याग में कठिनाई हो।
4. अण्डकोश में कोई लम्प बनता हुआ महसूस हो।
5. किये गये छिद्र से रक्त का बहाव यदि दस मिनट तक उस स्थान पर 2 गेज के पैड लगाने पर भी रूके नहीं।
क्या नसबन्दी से व्यक्ति के सम्भोग परक जीवन पर कुछ प्रभाव पड़ता है?

नसबन्दी का घाव भर जाने के बाद आपके यौन सम्बन्धों में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आना चाहिए। पहले की तरह ही अब भी आपका वीर्य निष्कासित होगा और यौनेच्छा में आपको बिल्कुल भी बदलाव महसूस नहीं होगा।
नसबन्दी के बाद वीर्य का क्या होता है?

एक बार जब वीर्य को शुक्राशय में प्रवेश नहीं मिलता तो आपकी अण्डग्रन्थियां कम शुक्राणु बनायेगी। जो शुक्राणु बनेंगे वे शरीर में ही समाहित हो जायेंगे।
पुरूष द्वारा नसबन्दी या औरत द्वारा बन्ध्यीकरण में से क्या बेहतर है?

प्रत्येक दम्पति को यह आपस में निर्णय लेना होता है कि उनके लिए क्या उत्तम है। दोनों ही प्रभावशाली, सुरक्षित और स्थायी है। हालांकि महिला बन्ध्यीकरण की अपेक्षा पुरूष की नसबन्दी अधिक सरल और सुरक्षित होती है। कम महंगी भी है और अधिक प्रभावशाली भी है।
क्या नसबन्दी से प्रोस्ट्रेट के कैंसर का खतरा हो जाता है?

नहीं, नसबन्दी से प्रोस्ट्रेट के कैंसर का खतरा नहीं बढ़ता है।
क्या एच आई वी से प्रभावित व्यक्ति नसबन्दी करवा सकता है?

हां, एच आई वी से प्रभावित व्यक्ति नसबन्दी करवा सकता है।
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प्राकृतिक परिवार नियोजन विधि

परिवार नियोजन की प्राकृतिक विधियां क्या हैं?

ये वह विधियां हैं जिनके अन्तर्गत माहवारी चक्र की उर्वरक अवधि में महिला सम्भोग से परहेज करती है।
महिला को उर्वरक माना जाता है?

अण्डे के निष्कासन और उससे कुछ दिन पहले की अवधि को उर्वरक अवधि माना जाता है। सामान्यतः चक्र की मध्यावधि में अण्ड निष्कासन होता है। अधिक पक्के तौर पर हम कह सकते हैं कि यह सामान्यतः रक्त स्राव के प्रारम्भ से 14 दिन पहले होता है।
प्रचलित प्राकृतिक परिवार नियोजन की कुछ विधियां कौन सी हैं?

प्रचलित प्राकृतिक परिवार नियोजन विधि में शामिल हैं – आवर्तन प्रणाली, ग्रीवा परक ग्युकस विधि, शरीर के मूलभूत तापमान (बीबीटी) की विधि, मानक दिन विधि (एस डी एम)
आवर्तक (रिदम) प्रणाली क्या है?

आवर्तक प्रणाली इस भाव पर आधारित है कि माहवारी चक्र शुरू होने के चौदह दिन पहले महिला अण्डा विसर्जित करती है। इसी मान्यता के आधार पर आवर्तन प्रणाली में महिला से अपेक्षा की जाती है कि पीरियड के पहले दिन से वह पिछले चौदह दिनों को गिने। सम्भावना है कि यही अण्डा विसर्जन का दिन रहा होगा और अगले महीने भी इसी दिन होगा। इस अवधि में वह या तो सम्भोग से बचेगी या कंडोम जैसी किसी अन्य विधि का प्रयोग करेगी अगर गर्भधारण नहीं करना चाहती।
आवर्तन में कमियां क्या है?

आवर्तन प्रणाली की असफलता की दर 13 से 20 प्रतिशत जितनी ऊँची है। जिन औरतों का माहवारी चक्र अनियम्त होता है या जिनके चक्र में हर महीने एक समान दिन नहीं होते उनके लिए इस प्रणाली की संतुष्टि नहीं की जाती।
ग्रीवापरक ग्युकस प्रणाली क्या है?

यह प्रणाली इस भाव पर आधारित है कि अण्डे के निष्कासन के समय या आसपास के दिनों में ग्रीवापरक ग्युकस पतला और चिपकने वाला हो जाएगा।
128. यह प्रणाली इस भाव पर आधारित है कि अण्डे के निष्कासन के समय या आसपास के दिनों में ग्रीवापरक ग्युकस पतला और चिपकने वाला हो जाएगा। अतः यदि आप गर्भधारण करना नहीं चाहते तो जैसे ही फिसलन भरा, लचीला म्युकस निकलता देखें तो सम्भोग से परहेज करें और उसके बन्द होने के दो दिन बाद तक करते रहें।
ग्रीवापरक म्युकस का परीक्षण कैसे किया जाता है?

अपनी अंगुली से या टॉयलट पेपर से योनि के आसपास पोछें और फिर म्युकस को देखें। उसके घनत्व को देखें और उसे अपनी अंगुलियों में खींच कर देखें। यदि बिना टुटे कम से कम तीन इंच तक खिंच जाए तो सोच लें कि अण्डा देने का समय होने वाला है।
ग्रीवापरक म्युकस प्रणाली की कमियां क्या हैं?

इसकी असफलता दर 20 प्रतिशत जैसी ऊंची है।
मूलभूत शारीरिक तापमान प्रणाली क्या है?

(बी बी टी)यह प्रणाली इस तथ्य पर आधारित है कि अण्डा निःसृति के समय के आसपास शरीर का तापमान 0.5 डिग्री से 1 डिग्री तक बढ़ जाता है। जब तापमान को निरन्तर बढ़ते देखें और अगर वह कम से कम तीन दिन तक रहे तो समझ लें कि अण्डा निःसृत हो गया है, इससे यह समझा जा सकता है चक्र के शेष भाग में सम्भोग करते रहने से गर्भधारण नहीं होगा।
बी बी टी प्रणाली को कैसे किया जाता है?

सुबह बिस्तत से उठने से पहले हर रोज महिला को अपना तापमान देखना होता है। देखकर उसे एक चार्ट में रिकार्ड करें ताकि आप दिन प्रतिदिन के उतार चढ़ाव को देख सकें। जिस दिन शरीर का तापमान बढ़ा हुआ रहे उस दिन और उसके बाद सात दिन तक सम्भोग से परहेज करें।
बी बी टी प्रणाली की प्रभविष्णुता कैसी है?

बी बी टी प्रणाली की असफलता दूर औसतन 15 प्रतिशत की है पर सही इस्तेमाल करने वालों के लिए 2 प्रतिशत प्रतिवर्ष जैसी कम भी है।
मानक दिन प्रणाली (एस डी एम) क्या है?

26 से 32 दिन के बीच के माहवारी चक्र वाली औरतों के लिए यह एक नवीन प्राकृतिक परिवार नियोजन की प्रणाली है। प्रत्येक माहवारी चक्र के उर्वरक दिन को जानना इस प्रणाली में शामिल है। ऐसी महिलाएं आठवें से उन्नीसवें दिन तक असुरक्षित सम्भोग का परहेज कर के गर्भधारण से बच सकती हैं।
एस डी एम प्रणाली व्यवहार कैसे किया जाता है?

एस डी एम का उपयोग काफी सीधा साधा है। दो प्रकार की प्रणालियों का व्यवहार किया जाता है।
(1) पारम्परिक प्रणाली – गिनते रहें कि आप का माहवारी चक्र कितना लम्बा है, ताकि आप सुनिश्चित कर सकें कि 8वें से 19वें दिन कब है (1) जब आपकी माहवारी का पहला दिन होता है वही चक्र का पहला दिन होता है। (2) दिन 1 और 7 के बीच गर्भधारण की सम्भावना बिल्कुल भी नहीं रहती इसलिए इन दिनों बिना किसी निरोधक साधन के सम्भोग करना सुरक्षित माना जाता है। (3) दिन 8 से 19 तक आप पूरी तरह उर्वरक रहते हैं या तो आप सम्भोग न करें अथवा कंडोम जैसे किसी साधन का उपयोग करें (4) दिन 20 से 32 में फिर गर्भधारण की सम्भावना नहीं रहती इसलिए आप पुनः सम्भोग कर सकते हैं।
(2) बीड चक्र – यह कण्ठहार की आकृति में 32 रंगदार बीड्स की माला होती है। उस में अक रबड़ का रिंग होता है जिसे कि हर बीड पर लगाया जा सकता है जिससे कि पता चलता है कि आप चक्र के कौन से दिन पर हैं। कण्ठहार में तीन रंग के बीड्स होते हैं (क) लाल : साईकल बीड हार में एक लाल बीड होता है। यह आपकी माहवारी के पहले दिन का सूचक है। इसी दिन आप को माहवारी होती है। (ख) भूरा (ब्राउन) – बीड्स दिखाते हैं कि आप के चक्र में वे दिन कौन से हैं जबकि गर्भ धारण की आशंका नहीं होदी। (ग) सफेद – अंधेरे में चमकने वाले ये बीड्स उर्वरक दिनों के सूचक हैं (8 से 19)। हर दिन के बीतने पर आप रिंग को अगले बीड पर डाल देते हैं। जब रिंग सफेद बीड्स पर आयेगा तो आप को पता चल जाएगा कि अब सम्भोग से बचना है या गर्भनिरोधक का उपयोग करना है।
मानक दिन (एस डी एम) का उपयोग कौन कर सकता है?

एस डी एम का उपयोग अधिकतर महिलाएं कर सकती हैं, फिर भी, प्रयोग से पहले देखना जरूरी है कि आप में ये विशेषताएं हैं
1. आप का माहवारी चक्र नियमित है
2. आप का चक्र 26 दिन और 32 दिन लम्बा है (यदि चक्र 26 दिनों से कम और 32 दिनों से अधिक लम्बा हो तो एस डी एम का असर कम होता है।
3. आप और आपका साथी उर्वरक दिनों में सम्भोग से परहेज करने अथवा निरोधपरक साधनों का प्रयोग करने के लिए तैयार हो।
एस डी एम विधि कितनी प्रभावशाली है?

जब नियंत्रित एवं सही ढंग से उपयोग किया जाता है तो एस डी एम अत्यन्त प्रभावशाली माध्यम है जन्म-नियन्त्रण के लिए। कुशलतापूर्वक प्रयोग करने पर 100 औरतों में से केवल पांच ही गर्भधारण करती हैं इस का अर्थ है कि गर्भ निरोध में यह उपाय 95 प्रतिशत प्रभावशाली है। यदि आप इसका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते या आप की चक्र 36 से 32 दिनों की परिधि से बाहर है तो एस डी एम का प्रभाव अपेक्षाकृत कम रहेगा, लगभग 88 प्रतिशत कह सकते हैं।

1 टिप्पणी »

  1. >’ऊपर कंडोम के टिप पर कम से कम आधा इंच जगह छोड़ दें’ कंडोम के टिप पर हाथ से दबा कर हवा निकाल दें अन्यथा वीर्य एकत्र होते समय यह फट सकता है।


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